ताजा खबर
इंदौर के पश्चिम बायपास को अहमदाबाद हाइवे से जोड़ने की तैयारी   ||    आरएनटी से एमवाय जाने वाले मार्ग चौड़ीकरण के लिए दीवार तोडी   ||    23 लाख इंदौरियों को लगना है बूस्टर डोज…आज से महाअभियान   ||    राजबाड़ा से गोपाल मंदिर और पीपली बाजार तक बनेगी नई सडक़   ||    जापानी सेंडविच पैनल तकनीक से बन रहे आम आदमी के मकान   ||    नजर आने लगा इंदौरी मेट्रो का स्वरूप   ||    नाबालिग से प्रेम विवाह, एक घंटे में दूल्हा पहुंचा जेल   ||    15 तरह के पुलिस वेरिफिकेशन होंगे ऑनलाइन एक माह में शुरू होगी सुविधा   ||    वॉइस ऑफ इंदौर की खबर से जागा नगर निगम, पलसीकर कॉलोनी में ड्रेनेज लाईन का तुरंत कराया काम   ||    इंदौर की पलसीकर कॉलोनी में ड्रेनेज लाईन चोक होने से स्थानिक परेशान,नही सुन रहे नगर निगम के अधिकारी   ||   

PAK आर्मी चीफ की फेयरवेल स्पीच, जनरल बाजवा बोले, अब दखल नहीं देगी फौज, जानिए और क्या कहा

Posted On:Thursday, November 24, 2022

मुंबई, 24 नवम्बर, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) जनरल कमर जावेद बाजवा 29 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। इसके पहले उन्होंने फेयरवेल स्पीच दी। इस भाषण में जनरल बाजवा ने साफगोई दिखाते हुए माना कि मुल्क की सियासत में फौज 70 साल से दखलंदाजी करती रही है, लेकिन अब नहीं करेगी। 61 साल के बाजवा ने सियासतदानों और खासतौर पर इमरान खान को बिना नाम लिए नसीहत देते हुए कहा, ये बहुत जरूरी है कि फौज के बारे में बोलते वक्त सलीके से शब्दों का चुनाव किया जाए। बाजवा ने आगे कहा, फौज के बारे में गलत बातें फैलाई जा रही हैं। लोगों को भड़काया जा रहा है। इतना ही नहीं, जब आलोचना की जाती है तो लहजा और लफ्ज बेहद खराब होते हैं। इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। मैं ये नहीं कहता कि फौज से गलतियां नहीं हुईं। और फौज ही क्यों? कोई भी इंस्टीट्यूशन गलतियां कर सकता है। इसमें नेता और सिविल सोसाइटी भी शामिल है। 

उन्होंने कहा, अब वक्त आ गया है कि हम अपने स्वार्थ और अहंकार को कोने में रखें और सिर्फ मुल्क के बारे में सोचें। पाकिस्तान इस वक्त बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है। हमारी इकोनॉमी सबसे बुरे दौर में है। जरूरत इस बात की है कि सभी सियासी पार्टियां घमंड छोड़कर एक साथ बैठें, पुरानी गलतियों से सीखें और मुल्क को इन हालात से निकालें। हमें लोकतंत्र की रास्ते पर ही चलना होगा। सियासत में जीत-हार चलती रही है और चलती रहेगी। उन्होंने यह भी कहा, बाजवा ने भावुक होते हुए कहा, मुल्क की हिफाजत के लिए हमने कुर्बानियां दीं और आज हमारे साथ जो कुछ हो रहा है वो नाइंसाफी है। जो शहीद हुए हैं, मैं उनको सलाम पेश करता हूं। मैं नहीं मानता कि 1971 में फौज नाकाम रही थी। अगर कोई नाकाम रहा था तो वो हमारे सियासतदान थे। उस वक्त 92 हजार नहीं, बल्कि सिर्फ 34 हजार सैनिक जंग के मैदान में थे। भारत के 2 लाख 50 हजार सैनिकों के साथ मुक्ति वाहिनी के 2 लाख फौजी भी थे। इसके बावजूद हम बहादुरी से लड़े। इसका जिक्र तो तब के इंडियन आर्मी चीफ फील्ड मार्शल मानेकशॉ ने भी किया था।


इंदौर, देश और दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Copyright © 2022  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.